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Friday, September 07, 2012

तुम्हे

तुम ख्वाब सी खुबसूरत कैसे 
कैसे हो मेरे ख्यालो जैसी 
क्या किसी ने चुरा के मेरे राज़ 
तुम्हे वैसे ही बनाया हैं 

तुम भीड़ में खो भी नहीं जाती  
मिल जाती हो इतफाक से हर कहीं 
क्या किसी ने चुरा के मेरे रास्ते
तुम्हे उन्ही रास्तो पर चलाया हैं   

तुम्हारी मुस्कराहट दिल को छूती 
आखों को तुम्हारी हंसी जगमगा देती
क्या किसी ने चुरा के मेरे हसीं पल 
तुम्हे ये सब बताया हैं  

जिंदगी कट रही थी यूँ ही 
की फरिश्तो से गुज़ारिश कितनी 
क्या किसी गुज़ारिश ने पुरी हो कर 
तुम्हे धरती पे बुलाया हैं 

1 comment:

INNOBELLA BANGALORE said...

EKDUM ORIGINAL ... JHAAKAS