About Me

I write poems - I m going towards me, I write stories - किस्से ओमी भैय्या के, I write randomly - squander with me

Friday, January 27, 2012

रात का दर्द


रात के अँधेरे को  
निराशाओं का मायने न बना दिया होता 
हमेशा तुमने बस 
इसके बीत जाने का इंतज़ार न किया होता 
रौशनी के लिए 
बस आने वाले दिन का आसरा ना लिया होता 
जो तुम कुछ और सुन पाते 
तो समझ जाते एक अकेली रात का दर्द 

दूर कहीं बैठे 
सितारों से लिपटी फिर भी दूर ही रहती 
चाँद भी इसका 
कभी आधा कभी पूरा तो कभी अमावस्या 
रतजगो में फंसे 
रात के मुसाफिरों ने भी इसको कोसा 
जो तुम कही ठहर जाते 
तो समझ जाते एक अकेली रात का दर्द 

2 comments:

Prakashyede said...

awesome, i like this...

Prakashyede said...

AWESOME, LIKED IT MOST...