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Thursday, January 26, 2012

जिनके खयालो से


एक ख्याल की जगह हो गयी खाली 
जो बात हुई आज पुराने दोस्तों से 
अब पता चला उठ गयी उनकी डोली
अरमान थे रोशन मेरे जिनके खयालो से

हमने सुना दुल्हन के लिबाज़ में 
उस दिन खूब लग रही थी वो 
मेहमानों के भीड़ में जाने 
पहचाने चेहरे खोज रही थी वो 
जब देखा मेरे दोस्त को 
पलकों से ये बात बतायी उसने 
नदी जो तैर आयी आखों में 
उसमे दो बुँदे भी है मेरे लिए   
अब जाना वो भी रोये थे याद करके हमे 
अरमान थे रोशन मेरे जिनके खयालो से

इतने भी दिन तो नहीं हुए 
अपना शहर हमे छोड़े हुए 
जैसे कल ही उसके घर पर 
गए थे कोई बहाना करके
मजाक में उसने कही थी शादी की बात
हमे लगा था हमे रोकने के है तरीके 
काश कुछ और पल उनसे चुराए होते  
अरमान थे रोशन मेरे जिनके खयालो से


(हमारे एक मित्र को समर्पित  )

1 comment:

main_sachchu_nadan said...

sahi hai dost ... mast hai :-)