About Me

I write poems - I m going towards me, I write stories - किस्से ओमी भैय्या के, I write randomly - squander with me

Sunday, July 31, 2011

तुम

एक अधुरी कविता हो तुम
मेरी कालजयी रचना हो तुम
एक अनसुलझा विचार हो तुम
कुछ लिख लेने की वजह हो तुम
होठो में छाई ख़ामोशी हो तुम
आँखों में तैरती ख्वाहिश हो तुम
कुछ पा लेने का हौसला हो तुम
कुछ खो देने का सुकुन हो तुम

जितना करीब आता हूँ
उतनी ही दुर हो तुम
जितना तुम्हे जानता हूँ
उतनी ही नयी सी हो तुम
कोई रिश्ता सा लगता है
फ़िर भी अंजान हो तुम
सोचता हूँ अक्सर यही कि
ज़िन्दगी ऐसी क्यों हो तुम?

5 comments:

Sweta said...

wonderful!!

subtlescribbler said...

inspirations mostly aisi hi hoti hai maybe iss liye. beautifully penned :)

sarah

main_sachchu_nadan said...

Bhai, kuch bhi kaho kamaal ho tum .. :-)

ओमी said...

thanks Sweta Sarah and Sachin :)..what s coincidence all you guy's name starts with "S" :)

Rakhee said...

Good one... :)